होना तो ये चाहिए था

होना तो ये चाहिए था कि जब हम लफंडरों की तरह बाइक पर घूमते हुए तुम्हें पहली बार देखे, तब पलट कर तुम्हें भी हमें देखना चाहिए था और देखते रहना चाहिए था। पर हुआ यूँ कि तुमने हमें इग्नोर किया।
होना तो ये भी चाहिए था कि जब हम सड़क पर घसीटते हुए ब्रेक मारकर, बस स्टॉप पर तुम्हारे सामने बाइक रोके और अपने 120 रुपए वाले Re Ben को उतारकर उसे अपनी शर्ट के 2 खुले बटनों के अंदर ठूसे, तो बैकग्राउंड में रोमैंटिक म्यूज़िक बजना चाहिए था, धीरे-धीरे हवा चलनी चाहिए थी और तुम्हारी उड़ती ज़ुल्फ़ों में से झांकती आँखों को हमारी घूरती आँखों से टकरा जाना चाहिए था। पर ऐसा नहीं हुआ। आँखें तो टकराईं, पर हम तुम्हें घूर रहे थे और तुम हमें देखकर नाक-मुहँ सिकोड़ रही थीं।
होना तो ये चाहिए था कि जब हमने चिल्ला चिल्ला कर, सीटी मारकर तुम्हारी बालकनी के नीचे उतपात मचाया तो तुम्हें बालकनी में आकर हमें चुप कराना चाहिए था। हम नीचे बुलाते तो अम्मा-बाबा के सोने का हवाला देना चाहिए था और हमसे मिलने की ख़ुशी को अपनी बेबसी में छुपाकर, दबे पाँव नीचे आकर हमसे मिलना चाहिए था। पर हुआ यूँ कि बालकनी में तुम्हारी अम्मा आईं, हमको झाड़ू दिखाईं और नीचे तुम्हारे बाबा आए, खूब कूटे, खूब सूते और हम जान बचाकर दौड़ते नज़र आए।
होना तो ये चाहिए था कि तुम्हें अगले दिन कॉलेज जाते वक़्त हमसे माफ़ी मांगनी चाहिए थी, हमारे दिल की ना सही, हमारी चोट की गहराइयों के बारे में पूछना चाहिए था, हमारे ज़ख्मों को फू-फू करना चाहिए था, अपने दुपट्टे का सिरा फाड़कर हमारी चोट पर बांधना चाहिए था। पर तुम फिर से हमें इग्नोर करके सीधी निकल गईं। हमने तुम्हारा हाथ पकड़कर तुम्हें रोकना चाहा, पर तुम हाथ छुड़ाकर भागने लगीं।
होना तो ये चाहिए था कि हमें तुमसे पहली नज़र का प्यार हुआ था तो तुम्हें भी होना चाहिए था। पर ना जाने क्यों तुम्हें नहीं हुआ। फिर हम क्या करते, कोई चारा छोड़ा था क्या तुमने? अब प्यार से ना सही तो ज़बरदस्ती ही सही, तुम्हें हासिल तो करना ही था।
होना तो ये चाहिए था कि हमको अपने पीछे आता देख तुम्हें डर कर हमसे, “छोड़ दो, छोड़ दो” की गुहार लगानी चाहिए थी। हमारे सामने गिड़गिड़ाना चाहिए था। पर हुआ यूँ कि तुम भागने तो लगीं पर तुम झुकी नहीं। ना तुम गिड़गिड़ाई ना घबराईं।
होना तो ये चाहिए था कि हम मर्द हैं तो हमें तुम्हें अपने बल से तुम्हें हासिल कर लेना चाहिए था। तुम्हारी आबरू पर वार कर देना चाहिए था। पर हुआ यूँ कि तुमने अपने बैग से हम पर वार किया। हम जैसे ही नीचे गिरे, तुमने हमारे चेहरे पर pepper spray छिड़क दिया। हम कुछ समझ पाते इससे पहले ही तुमने लातों की बौछार शुरू कर दी और हम वहीं धराशाई हुए पड़े रहे।
होना तो ये चाहिए था कि हमें तुम्हारे अबला, बेचारी वाले फ़िल्मी रूप के दर्शन होने चाहिए थे, पर हुआ यूँ कि हमें तुम्हारे दुर्गा काली वाले वास्तविक रूप का सामना करना पड़ा।⁠⁠⁠⁠

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