बर्थडे गिफ्ट | Birthday Gift

”हैप्पी बर्थडे मैडम।” ”थैंक्स। अच्छा हुआ बर्थडे आ गया वर्ना IPS साहब को तो याद तक नहीं आती।” ”नहीं यार, याद तो आती है बस वक़्त नहीं मिलता, मगर हाँ तुम्हारा प्राइम टाइम शो कभी मिस नहीं करता।” ”शुक्रिया! अब सच बताओ, ये मक्खन था या सही में देखते हो?” ”कल वाली लाल कुर्ती बहुत खूबसूरत थी, मगर आज जो तुम पहनोगी वो ज्यादा खूबसूरत होगी।” ”तुम्हें कैसे पता?” ”ये तुम्हें ऑफिस जाकर पता चलेगा।” ”ओह! तुम्हारी ये बात को बीच में छोड़ सस्पेंस बाँधने की आदत नहीं गई।” ”हा हा। वैसे याद है जब यूनिवर्सिटी में थी तो हिंदी का एक वाक्य बोलने में अटकती थी, आज देखो क्या फटाफट सवाल करती हो।” ”सब तुम्हारी क्लास का नतीजा है, तुमने ही हिंदी को दिलचस्प बनाया था मेरे लिए।” ”मैंने या मेरे पढ़ाने के स्टाइल ने?” ”उफ़! तुम भी ना। अच्छा ये बताओ, कैसा चल रहा है तुम्हारा काम उस बीहड़ में?” ”हाँ बस चल रहा है। आजकल ओवरटाइम करने लगा हूँ ऑफिस के बाद, यहाँ आस-पास के गाँव के बच्चों को पढ़ाता हूँ ताकि नक्सली इनके दिमाग़ में आतंकवाद के बीज ना बो सकें और बस ऐसे ही दिन कट जाते हैं।” ”वाह! तुम पर तो एक दिन मैं कवर स्टोरी करुँगी।” ”इंतज़ार रहेगा आपकी कवर स्टोरी का।” ”जी ज़रूर। चलो अपना ख्याल रखना, अभी रखती हूँ, ऑफिस के लिए देर हो रही है।” ”चलो ओके! मज़े करो! हैप्पी बर्थडे वन्स अगेन!” उस दिन के बाद दोनों की फ़ोन पर कभी बात नहीं हुई। रेखा ने मनोज द्वारा भेजी कुर्ती जन्मदिन पर पहन अपना शो किया और बाद में मनोज को मेसेज कर गिफ्ट के लिए शुक्रिया भी कहा। इसी बीच मनोज अपनी ड्यूटी के साथ साथ नक्सली गाँव में बच्चों को पढ़ा लिखा कर समाज की अच्छाइयों से अवगत करा रहा था और उसे उसके इस उदार कदम की काफी सराहना भी मिलने लगी थी। वक़्त का पहिया बीत रहा था और दोनों अपने अपने काम में व्यस्त थे। यूनिवर्सिटी के वक़्त साथ साथ एक जगह पर काम कर अपने बीच प्रेम को मरने ना देने के वादे को जुनून नाम के दीमक ने कब खा लिया था दोनों को ही पता नहीं चला। आज मनोज का जन्मदिन है और रेखा ने मनोज को एक सरप्राइज़ विज़िट के साथ साथ उसके समाज सेवा कार्य को कवर करने का तोहफा सोचा है। रेखा सुबह सुबह जल्दी तैयार होकर अपने कैमरामैन को साथ लेकर पांच घंटे लम्बे दिल्ली से नक्सल-प्रभावी छेत्र डोसा को निकल पड़ी। इतना लम्बा सफ़र कर जब वो डोसा पहुँची तो उसकी गाड़ी को एक फौजी ने रोक लिया। ”सर हमें अन्दर जाना है।” “मैडम अभी आप नहीं जा सकती।” “क्यों?” “बस नहीं जा सकती।” “देखिये मुझे ACP मनोज कुमार से मिलना है। वो मेरे अच्छे मित्र हैं और उनपर एक स्टोरी के सिलसिले में मैं यहाँ आई हूँ। एक मिनट मैं आपकी बात करवा देती हूँ।” “मैडम मनोज सर अब बात नहीं कर सकते।” अगले दिन रेखा ने तीन वाक्यों की एक खबर अपने चैनल पर पढ़ी। “नक्सल-प्रभावी छेत्र डोसा में बच्चों को सही मार्ग दिखा रहे ACP मनोज कुमार की हत्या कर दी गई है। गाँव-वासियों के मुताबिक मनोज को बच्चों को पढ़ाने के लिए नक्सल दलों से काफी बार जान की धमकी मिली थी मगर उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं लिए। हत्या कैसे और किसने की इसकि अभी पुष्टि हो नहीं पाई है मगर संदेह नक्सल दलों पर ही जाता है। अब आगे देखें खास एक घंटे का प्रोग्राम, “कैसे अचार गिरने पर सास ने लगाई बहू को फटकार? क्यों सिमरन छोड़ रही है अपना मायका? क्या सुनील देगा रोशनी को तलाक़? जल्द ही सास, बहु और ट्रैजडी में।”

Comments

comments

This post has been viewed 29 times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *