Unposted Letter : mesmerizing event for a girl Love

नई नई जॉब लगी थी तुम्हारी , और एडजस्ट करने में तुम्हें टाइम लग रहा था । तब मैं कॉलेज में थी । शुरुआत में ही, हमारी दिन रात की बात , 24 घंटे में से आधे घंटे पर आ सिमटी , पर मैं खुश थी , क्योंकि तुम साथ थे , काफी था। कुछ समय बाद , वो आधे घंटे रात के 10 मिनट बन गए … पर कभी तुमसे शिकायत नहीं हुई ।

तुम्हें वक्त वक्त पर मैसेज करना , जानते हुए भी क़ि इनका कोई रिप्लाई नहीं आएगा , खुशी दे जाता था । जवाब के लिए भला कौन प्यार जताता है , बस तुम्हारी याद जब तर्कों की सीमा को लांघ जाती थी , तो रहा नहीं जाता था , और झट से तुम्हें टेक्स्ट कर देती थी। लगता था , हाँ मुझे कोई बहुत ध्यान से सुन रहा है। तुम्हारे लहज़े में तुम्हारे जवाब तुम्हारी तरफ से खुद ही को देती थी , हर बार, और खुश हो जाती । उस वक्त जब कॉलेज में मौज मस्ती की , दोस्तों की कोई कमी नहीं थी , दिन भर इस इंतज़ार में बीतता क़ि कब रात हो , कब तुम ऑफिस से लौटो , तुम्हारी आवाज़ कानों में पड़े तो चैन मिले ।

स्क्रीन पर तुम्हारा नाम डिस्प्ले होता था ना , तो लगता था जैसे दिन भर की मौत के बाद कोई नई ज़िंदगी भर आई हो । और गलती से जो तुम्हारा कॉल मिस हो जाए , और दोबारा जब तक मैं कॉल लगाऊं तुम इतने थके रहते , क़ि 5 मिनट के अंतराल में ही सो चुके होते .. रिंग जाती रहती पर दूसरी तरफ से कॉल रिसीव नहीं होता … खुद को रात भर कोसती ।

दिन भर से जिस रात का इंतज़ार करती थी, शाम होते ही जो इंतज़ार और मुश्किल होने लगता था .. वो रात आई और बिना तुमसे मिलवाए चली भी गयी, फिर अगले 24 घंटों तक कैसे रुकूं । पर रूकती थी , तुमने office hours में कॉल करने से मना किया था तो कभी नहीं किया , सुबह तुम्हारे office जाने से पहले भी नहीं , जानती थी तुम लेट हो जाते हो । वो 5 मिनट भी मुझसे छीन लिए तुमने फिर , याद है ? तुम्हारा कॉल नहीं आता था , अब मैं कॉल करती थी , और तुम्हारी थकी उनींदी आवाज़ , “जान , कल बात करें ? थका हूँ , नींद आ रही है।” और मेरा रत्ती भर भी विरोध नहीं ।

मेरी बिसात भी नहीं थी हालांकि , तुम्हारे सामने कुछ बोल पाऊँ , ऐसा चाहकर भी कहाँ हो पाया । पर प्यार जस का तस था , उतना ही ,बल्कि पहले से ज्यादा शायद। इंतज़ार प्रेम की पराकाष्ठा तक पहुंचाता है , यकीनन । वो लड़की, जो दिन भर किसी तरह रात की बाट जोहती थी , उसे तुमने शनिवार तक का इंतज़ार करने तक की ताब दे दी , जादू से थे तुम ! हफ्ते भर का इंतज़ार , क़ि वीकेंड आए तो तुमसे खूब सारी बातें करूं, सब बताऊँ, तुम्हें साथ पाऊँ । और फिर , वो शनिवार भी , तुम्हारे मेट्रो शहर ने मुझसे छीन लिया। याद है सैटरडे नाइट ? मेरे कॉल पे कॉल के रिस्पॉन्स में तुम्हारा एक मैसेज , ” दोस्तों के साथ नाइट आउट पर हूँ जान, हो पाया तो कल बात करता हूँ , सच्ची सौरी , तुम सो जाना , लव यू।” उस रात भी तुमपर गुस्सा क्यों नहीं आया ? हाँ रोई , बहुत रोई , तकिया भीग गया … पर गलत हमेशा परिस्थितियों को माना , तुम्हें नहीं । बहुत से मैसेज किये तुम्हें उस रात , क़ि किस तरह हफ्ते भर से इंतज़ार कर रही थी , क़ि किस तरह तुम्हारी जब बेहद याद आती है तो बाएं हिस्से में एकदम से बेइन्तहां दर्द उठता है , मेडिकल तर्क समझ नहीं आया although, तुम तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं मिलता , छटपटा जाती हूँ साँसों के लिए , और रोते रोते कब नींद लग जाती है , पता नहीं चलता , सुबह उठती हूँ तो सर दुःख रहा होता है , और फिर तुम याद आ जाते हो ।

वो शनिवार भी छिन गया फिर । अब मैं गर 10 दिन कॉल ना करूँ तो तुम भी ना करो। मन को अभी भी यकीन था , प्यार करते हो तुम बस वर्क लोड है । एक दिन बस पूछा था तुमसे , ” मैं कब तक रहूँ ऐसे ? अब नहीं हो पा रहा , मुझे पहले वाले तुम चाहिए । कभी सब कुछ पहले जैसा हो पाएगा क्या ?” , जिसपर तुमने चिल्ला दिया था , क़ि तुमपर वैसे ही काम का बोझ है , और मैं चाहूँ तो जा सकती हूँ , गर तुम्हारे साथ रहना है तो ऐसे ही रहना होगा। मैंने दूसरा ऑप्शन चुना , क्योंकि तुम्हें छोड़ने का तो कभी सवाल ही पैदा नहीं हुआ। महीने गुज़रे थे ऐसे , पर कभी शिकायत नहीं की , तुमसे प्यार था आखिर।

फिर परिस्थितियां बदलीं , बनीं , बिगड़ीं, सब हुआ , प्रेम सालों साथ रहा। सुनो , वो बच्ची थी तब , वो नेल पेंट्स बदलती , बंक मारती , नए लोगों से दोस्ती करती , नई जगहें घूमती , फूल की तरह महकती , तितली की तरह मंडराती , नदी की तरह अविरल बहती … उसकी तासीर बदल दी तुमने , उसकी चंचलता को थाह दे दी उम्र से पहले , उसकी इबादत थे तुम , उसने ज़िंदगी के सबसे हसीं साल तुम्हारे नाम कर दिए, खुशी खुशी। जब उसकी ज़िंदगी को थाह चाहिए थी , तब बंजारा बना छोड़ दिया , दर दर भटकने ? उसका प्यार , तुम्हारी एक सच्ची कोशिश तक का हकदार नहीं था? सच कहो , क्या वाकई , उसे छोड़ना इतना आसान था ?

Comments

comments

This post has been viewed 203 times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *