एक ATM का खुला खत: अगले जन्म मोहे ATM ना कीजो!

डिस्क्लेमर: इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है।


प्यारे पीएम मोदी,

8 नवंबर को जब से आपने पुराने नोट बंद किए हैं तब से मेरा दरवाज़ा बंद होने का नाम नहीं ले रहा। पहले मैं आधा टाइम खराब रहता था, अब तो मेरा पूरा टाइम ही खराब हो गया है। न मेरे बाहर लगने वाली लाइन छोटी हो रही है और न मुझ पर बनने वाले जोक बंद हो रहे हैं…

 

पहले जो लोग मुझे ऑटोमेटिक टेलर मशीन के नाम से जानते थे, अब वही मेरे सामने एक नोट चिपका गए हैं ‘आएगा तो मिलेगा’। मेरी परेशानी का अंदाजा आप इससे लगा लीजिए कि जब भी कोई नया कस्टमर मेरे पास कैश लेने आता है, तो मन ही मन सोचता हूं ‘आ तू भी…..खैर, ठेके के बाहर लगी जिन लंबी-लंबी लाइनों को देखकर कभी मेरी हंसी नहीं रुकती थी। आज वही लोग मेरे सामने खड़े होकर मुझ पर हंसते हैं।

 

ऊपर से ये रिपोर्टर खबर दिखाने के लिए इतने उतावले होते हैं कि एक ने तो मेरे मुंह में ही माइक डाल के पूछ लिया कि ‘सर बाहर बहुत भीड़ है। आपको निकलने में तो कोई दिक्कत नहीं हो रही ना!’ अब आप ही बताइए ये तो बिल्कुल वैसा ही है, जैसे जवाब मालूम होने के बाद भी कोई केजरीवाल से पूछे कि मोदी जी के फलाना फैसले पर AAP साथ हैं या नहीं? मैं मेरे सामने लगने वाली भीड़ को लेकर इतना आश्वस्त हो चुका हूं कि मुझे मेरे कैशलेस होने का पता भी तब लगता है, जिस दिन मेरे सामने लाइन नहीं दिखती है।

 

प्रिवेसी की तो मैं बात ही नहीं कर सकता। लोग लाइन में लगकर नई-नई गर्लफ्रेंड पटा रहे हैं औऱ आपके इस फैसले के कारण मैं पिछले 15 दिनों से मेरे बगल वाले ATM की तरफ झांक तक नहीं पाया। मैं आपके निर्णय के खिलाफ नहीं हूं लेकिन उन लोगों के खिलाफ हूं, जो गेट में घुसते ही तो प्रणाम करते हैं और उनके ट्रांजैक्शन के टाइम कैशलेस होने पर मुझे इतनी गालियां देते हैं जितनी तो शायद अनुराग कश्यप की मूवीज में भी नहीं होतीं।

 

बस और नहीं सहा जाता…सालों तक मैंने ईमानदारी से काम किया। मज़ाल हो कभी किसी का एक रुपया भी मारा हो, मगर मुझे इस ईमानदारी का क्या सिला मिला? मेरे अंदर से रुपए निकालने के लिए मुझे उखाड़कर ले जाते हैं, मेरे साथ तोड़फोड़ करते हैं। पैसा बैंकवाले नहीं डालके जाते, गालियां मुझे पड़ती हैं। बस मोदी जी बस, मुझसे और नहीं सहा जाता। मैं ऊपरवाले से बस यही कहूंगा कि अगले जन्म में चाहे तो मुझे राहुल गांधी का समर्थक बना दे, साजिद खान की फिल्म का दर्शक बना दे…बस एक रहम कीजो… अगले जन्म मोहे ATM ना कीजो!

 

सादर

एक भन्नाया ATM

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One thought on “एक ATM का खुला खत: अगले जन्म मोहे ATM ना कीजो!

  • November 30, 2016 at 5:26 am
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    Actual status of atm right now,lovly letter

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