कैसे इस शख्स ने 150 रूपये की मामूली पगार पर नौकरी करते हुए 1600 करोड़ की कंपनी के मालिक बन गए?

यह कहानी एक ऐसे शख्स की है जिसने महज़ 18 साल की उम्र में बेहतर आजीविका के लिए देश को छोड़ दुबई के लिए रवाना हो गए। जेब में एक कौड़ी भी नहीं किसी तरह नाव यात्रा कर पांच दिन में दुबई पहुंचें, एक ऐसे शहर में जहाँ उस वक़्त न कोई हवाई अड्डा था, न बिजली, न कोई सड़क, न टेलीफोन, और न ही तेल। फिर इन्होनें दो जून की रोटी के लिए एक प्राइवेट कंपनी में 150 रूपये की मामूली पगार पर काम करने शुरू कर दिए। आज वही शख्स खाड़ी देशों में एक बड़े पूंजीपति की कतार में शामिल हैं और इनकी सम्पति आज लगभग 1600 करोड़ के आस-पास है।

 

 

 

जी हाँ सफ़लता की यह कहानी है प्रसिद्ध विदेशी सिंधी व्यापारी राम बक्सानी की। सिंध में एक उच्च मध्यम वर्गीय परिवार में जन्में और पले-बढ़े, बक्सानी को शरणार्थियों के रूप में छह साल की उम्र में उनकी दादी, मां, भाई और बहनों के साथ भारत की ओर पलायन करना पड़ा था। पलायन के कुछ ही दिनों बाद उनके पिता का स्वर्गवास हो गया। परिवार के लिए आय का कोई स्रोत नहीं होने के स्थिति में इन्होनें 18 वर्ष की आयु में दुबई जाने का फैसला लिया।

 

 

किन्तु नए शहर में जॉब पाना इतना आसान नहीं था। काफी ढूंढने के बाद उन्होंने 150 रूपये की मामूली पगार पर एक प्राइवेट कंपनी में सहायक कर्मचारी के रूप में काम करने शुरू कर दिए। इस दौरान उन्होंने कई और कंपनियों में काम करने के लिए आवेदन किये। एक दिन उन्हें आईटीएल नाम की एक कंपनी से जॉब पुष्टि की सूचना मिली और फिर उन्होंने वहां काम करना शुरू कर दिया।

मुझे सिर्फ 150 रूपये पगार में मिलते थे और उसमें से मैं

100 रूपये बचा लिया करता था — राम बक्सानी

ने एक साक्षत्कार के दौरान बोला 

 

 

उस वक़्त आईटीएल समूह बहुत छोटा था और कंपनी में काफी कम लोग काम करते थे। बक्सानी ने वहां काम करते हुए अपने सेविंग्स पर काफी जोड़ दिया और कई लाख रूपये की सेविंग्स करने में कामयाब हो गए। एक वक़्त के बाद दुबई में व्यापार जगत तेजी से आगे बढ़ा और इस मौके का फायदा उठाते हुए बक्सानी ने आईटीएल समूह में अपनी पूरी बचत निवेश कर दी और आपको आश्चर्य होगा आज वह इस समूह में 50 प्रतिशत शेयरधारक है।

केवल यही नहीं, आज वह आईटीएल समूह के चेयरमैन भी हैं और इनके नेतृत्व में आज कंपनी वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी और आतिथ्य क्षेत्रों में एक अग्रणी कंपनी का रूप ले चुकी है। इसके अलावा कंपनी कई अन्य अंतराष्ट्रीय ब्रांडों का भी प्रतिनिधित्व करता है, जिसके संयुक्त अरब अमीरात और ओमान में 500 से ज्यादा डीलर भी हैं।

 

 

एक अनुमान के अनुसार बक्सानी आज करीब 1600 करोड़ के मालिक हैं जो उन्हें संयुक्त अरब अमीरात में सबसे अमीर आदमी की फेहिस्त में शामिल करता है। उन्होंने भारत क्लब, दुबई और इंडियन हाई स्कूल, दुबई के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है।

 

 

 

 

 

व्यापार की सफलता के अलावा बक्सानी समाज की भलाई से जुड़ी कई परियोजनाओं में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं। उन्होंने सिंधी समुदाय और सिंधी साहित्य की सेवा के लिए एक ट्रस्ट की स्थापना भी की है, जो हर वर्ष पुरस्कार से सम्मानित कर लोगों को प्रोत्साहित करता है। इतना ही नहीं वे गरीबों और वंचितों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

एक आदमी जो कभी 150 रुपये की पगार पर अपने जीवन की शुरुआत करी थी, वह आज दुनिया के एक बड़े कंपनी में सबसे बड़े शेयरधारक हैं।

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