बिछडन | Separation of lovers

आज फिर से वो दोनो, उसी स्टेशन के उसी प्लैट्फ़ॉर्म पर उसी ट्रेन का इंतज़ार कर रहे हैं। आज जाने क्यूँ दोनो के चेहरों पे भारीपन नही दिख रहा। लड़का आज ख़ुश है । आज लड़की बिना बताए ही surprise देने आयी थी। वो अभी भी विश्वास नही कर पा रहा कि ये सच है या सपना।
ट्रेन प्लैट्फ़ॉर्म पर आ रही है। दोनों फिर से लेडीज़ कम्पार्ट्मेंट की ओर चल पड़ते हैं।

डब्बे के बाहर प्लैट्फ़ॉर्म पर लड़की लड़के के सामने बिलकुल नज़दीक खड़ी है। लड़का सार्वजनिक स्थान की गरिमा को ध्यान में रखते हुए एक क़दम पीछे हट जाता है, लड़की भी इस इशारे को समझ कर ख़ुद को संयत करती है। लड़की लड़के को शेव ना करने की वजह से डाँट रही है। ” क्लीनशेव होके मैं बेवक़ूफ़ दिखता हूँ।” लड़का बोला। लड़की ने तुनक कर जवाब दिया, “तो हीरो बन के अब दिखाना भी किसको है।” लड़की झूठ-मूठ मुँह फुला लेती है, लड़का एक दो cheesy lines बोल के उसे मनाने की कोशिश करता है और दोनो साथ खिलखिलाने लगते हैं।

Compartment के पास ही दो पुलिसवाले हैं जो आपस में बात करते हुए, दोनो को देख रहे हैं।( ladies compartment में RPF के armed guard चलते हैं)
आज लड़की ख़ुश है क्यूँकि उसे लड़के के चेहरे पर उदासी नही दिख रही, उसे और चाहिए भी क्या!

ट्रेन ने हॉर्न दिया। लड़का लड़की को ट्रेन में चढ़ा रहा है। तभी पुलिसवाले ने टोका, ” कहाँ! दिखता नही लेडीज़ डब्बा है।” जवाब लड़की ने दिया, ” नही सर, सिर्फ़ छोड़ने आए हैं।”

लड़की लड़के का हाथ नही छोड़ना चाहती। वो दरवाज़े पर ही खड़ी है। उसे लड़के को देखते रहना है, जैसा कि वो हमेशा करती है। जब तक लड़का नज़रों से ओझल नही हो जाता, वो ऑटो में, रिक्शे में, ट्रेन में, बस में बस उसे देखती ही रहती है। वो अगली मुलाक़ात तक के लिए लड़के का चेहरा अपनी आँखों में भर लेना चाहती है। दोनों एक दूसरे को देख ही रहे थे कि पुलिसवाला डब्बे में चढ़ते हुए बोला, ” दरवाज़े पर क्यूँ खड़ी हो चलो, अंदर चलो|” लड़की का चेहरा बुझ सा गया, जैसे किसीने उसकी कोई क़ीमती चीज़ छीन ली हो। वो लड़के को ‘bye’ भी नही बोल पायी। उसने पनीली आँखों के साथ अंदर क़दम बढ़ाया। लड़की के क़दमों के साथ ही ट्रेन ने भी रेंगना शुरू कर दिया था। उसकी आँखों के कोरों पर आँसू की बूँदें छलक पड़ीं।

तभी पुलिसवाला मुस्कुराया और बोला, “अच्छा देख लो।” लड़की तुरंत गेट पर आयी। लड़का उदास मन से ट्रेन के साथ ही चल रहा था।लड़की को देखते ही उसकी आँखों में चमक आ गयी। दोनों अपलक एक दूसरे को देख रहे थे। ट्रेन की गति बढ़ती जा रही थी साथ ही लड़के के पैरों की भी। लड़की लड़के से इशारों में ही जाने को कह रही थी, पर एक लालच था उसकी आँखों में, कुछ देर और ‘उसे’ देख लेने का लालच।वो नही चाहती थी की ये ‘ उम्मीदों का प्लैट्फ़ॉर्म’ कभी ख़त्म हो। उम्मीद ही तो थी….. एकटक देखते रहने की उम्मीद, उम्र भर साथ निभाने की उम्मीद, एक दूसरे के सपनों को अपनी पलकों में सजाने की उम्मीद।

अब लड़का ट्रेन के साथ लगभग दौड़ सा रहा था। आगे foot overbridge आने पर लड़का हाथ हिलाता ऊपर चढ़ गया। और लड़की झाँकते हुए उसके नज़रों से ओझल हो जाने तक उसे देखती रही।

ट्रेन अब रफ़्तार पकड़ चुकी थी। अंदर मुड़कर उसने पुलिसवाले को देखा और आँखों से ही उसका शुक्रिया अदा किया। पुलिसवाला जवाब में मुस्कुराया और बोला, “अब तो बैठ जाइए मैडम! प्लेटफ़ार्म गुज़र गया।”

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