RoseDay | बाल प्रेम

आठवीं में पढ़ने वाली लड़की पे दिल आया था प्रवीन का! निहारिका नाम था उसका! प्रवीन सातवीं में था और निहारिका उससे एक साल सीनियर! सिर्फ़ प्रवीन के बेस्ट फ़्रेंड अर्पित को ये बात मालूम थी! फ़रवरी का दूसरा सप्ताह शुरू होने को था और प्रवीन ने दैनिक जागरण के “रंगीली” वाले कालम में वैलेंटाइन वाले सप्ताह के बारे में पढ़ रखा था!
सप्ताह का पहला दिन था “गुलाब दिवस” Rose Day! लौंडा सातवीं का था तो शर्माना तो लाज़मी था पर जब दोस्ती जय_वीरू वाली हो तो अर्पित ने भी दोस्ती निभाने में कोई कसर नही छोड़ी!
“अबे आज गुलाब लाएँ है निहारिका के लिए! दिल बहुत ज़ोर धड़क रहा है बे!” (प्रवीन ने इक्सायटेड होकर कहा)
“हाँ तो आज दे ही दो! आज नही कह पाए तो बेट्टा हमसे बात मत करना और हमारा 36 रुपिया जो उधार लिए हो वो वापिस कर देना!” (अर्पित ने थोड़ा ज़ोर दिया!)
“कोई देख लिया तो? पकड़े गए तो? पापा को पता चल गया तो? पापा को छोड़ो भैया अलग से पेलेंगे! उसी की क्लास में पढ़ते हैं वो!”
“तो ससुर फ़र्ज़ी दस रुपए का गुलाब ले आए! हमको डेदेते तो क़र्ज़ा कम हो जाता तुम्हारा थोड़ा सा! अबे प्यार करते हो बोल दो! वरना कोई और बोल ले गया तो ताकते रह जाओगे मुँह बाए!”
“यार हाथ काँप रहा है! तुम देदो न हमारा नाम बता के!”
“हाँ और कहीं कन्फ़्यूज़न में हमको हाँ बोल दी तो तो इसी गुलाब की बत्ती बना के कान खोदते रहना!”
“यार भाई!”
“चुप! जाओ उसकी साईकिल पे चुपके से धर आओ! और हाँ अपना नाम वाली पुर्चि रखना मत भूलना! वरना तुम हिंदी वाले से अंग्रेज़ी वाले फूल बन जाओगे!”
प्रवीन ने हिम्मत करके छुट्टी के समय फूल निहारिका की साईकिल की डोलची में रख दिया! इससे पहले की निहारिका पहुँचती उससे पहले समीर वहाँ पहुँच गया! (समीर वो लौंडा है जिस पर निहारिका का दिल फड़फड़ाता है! समीर को देखते ही निहारिका की आँखो में चमक जाग उठती है और समीर को भी निहारिका ख़ूब भाती है!)
समीर ने पुर्चि उठाई और कोने में खड़े प्रवीन को देख के क़ातिलाना गुण्डों वाली मुस्कान दी! फटना लाज़मी था! अर्पित भी जान गया था के प्रवीन की ज़लालत भी ख़ूब होनी है अब! अर्पित ने मुँह दूसरी तरफ़ घुमा के कहा “BC ये कहाँ से आगया?”
इससे पहले के वो कुछ बोलता के निहारिका साईकिल के पास आगयी! डोलची में गुलाब और पास में जनाब! हाय! क्या कहने थे! अनामिका को यक़ीन नहीं हो रहा था के ये सपना है या सच? निहारिका ने पूछा “ये तुमने लाया?” समीर ने हामी वाली मुस्कान दी और ब्लश मारने लगा! और फिर दोनो पैदल साईकिल थामे स्कूल से निकल गए!
“ये क्या कांड हो रहा प्रवीन?” (अर्पित ने स्लो मोशन में कहा!)
“साले कट गया मेरा!”
“अभी लड़ायी बाक़ी है गुरु! अभी पूरा हफ़्ता बाक़ी है!”
पी॰एस॰- नयी सीरिज़ शुरू हुई है! बाल प्रेम की! पढ़िएगा! उत्सुकता बनाए रखिए! क्या निहारिका सच जान पाएगी? क्या प्रवीन का ख़्वाब पूरा होगा? क्या समीर की असलियत उजागिर होगी? जानने के लिए इंतज़ार! पूरा हफ़्ता पढ़िए हमारे साथ! अभी रोमैन्स, रोमांच, ड्रामा, झगड़ा और कुछ किरदारों की एंट्री होनी बाक़ी है!
~शुभम

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