कल-आज-कल

“एक दिन ये प्यार-व्यार, ये सारी excitement सब ख़तम हो जाएगी। ” वो बोला।

” अच्छा ?” बौहें तरेरती हुई वो बोली।

“हाँ। मतलब एकदम से नहीं। पहले धीरे-धीरे सब कम होगा। ये बेचैनी, ये उतावलापन जो अभी है, कम हो जायेगा और फिर एक दिन सब ख़त्म।”

“तुम्हें कैसे पता ?” उसने पूछा

“ऐसा ही होता है। न तुम मेरी ज़िन्दगी में पहली लड़की हो, न मैं तुम्हारी ज़िन्दगी में पहला लड़का। हमारे पहले भी इश्क़ हुए हैं, break-ups हुए हैं।” वो बोला

“हाँ, हुए हैं। लेकिन हर बार तो ऐसा हो, ज़रूरी नहीं न। मैं जानती हूँ कि प्यार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। और हर वक़्त एक सा नहीं रहता। आज हम थोड़े free-से रहते हैं, ज़िन्दगी में ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ नहीं है। लेकिन कल वक़्त बदलेगा, हम अपने अपने कामों में ज़्यादा busy हो जायेंगे। शायद इतना वक़्त जो आज एक दूसरे को दे सकते है, कल नहीं दे पाएंगे। तो इसका मतलब क्या प्यार कम हो जायेगा ? समय न दे पाने से excitement काम हो जाती है क्या? ” वो बोली।

“अरे तुम समझीं नहीं। मतलब ये कि आज excitement है, क्योंकि हम अब तक एक दूसरे को जान रहे हैं, पहचान रहे हैं। हम दोनों के बीच एक mystery है, जो अब तक explore कर रहे हैं। कुछ समय बाद ये mystery, mystery नहीं रहेगी। एक दूसरे के बारे में सब जान जायेंगे। mystery ख़त्म हो जायेगी। फिर वही सब monotonous सा। फिर अनबन, झगड़े और फिर धीरे धीरे सब ख़त्म।” वो बोला।

“ऐसा कुछ नहीं होगा। अनबन, झगड़े तो होते ही हैं। इसका प्यार कम होने से क्या लेना देना। मैं तुम्हें छोड़ने वाली नहीं हूँ चाहे तुम जो कर लो।
तुम कोई खिलौना नहीं हो जिससे खेलकर मन भर जाए या बोर हो जाऊँ। ज़िन्दगी भर यूँ ही तुम्हारे साथ रहूंगी। लड़ूंगी, झगड़ूंगी, रूठूंगी लेकिन दूर जाने की तो बात भी मत सोचना। जोंक पता है न? वो जो इंसानों के शरीर से चिपककर खून पीती है, मैं वैसी हूँ। बस चिपकी रहूंगी, देख लेना। ” वो बोली।

“जोंक! हाहाहा !! हाँ लड़कियां और होती भी क्या हैं, खून ही तो पीती हैं लड़कों का। लेकिन जो मैं कह रहा हूँ वो सच है, देखना वैसा ही होगा।” वो बोला

“हाँ, ठीक है तो जाओ। कल क्यों, आज ही चले जाओ। मुझे नहीं बात करनी अब तुमसे।” वो बोली

“ये देखो, अब तक तो बोल रही थीं कि ज़िन्दगी भर साथ रहोगी, जोंक बनकर। और इतनी सी बात में जाने को बोल दिया? हो गया प्यार ख़त्म?” वो मनाते बोला।

“प्यार यूँ ख़त्म नहीं होता। वक़्त इम्तेहान लेगा, बदलेगा, लेकिन अगर वाकई प्यार है तो वो रहेगा। मुझे ‘कल क्या होगा?’ सोचकर इतनी घबराहट नहीं होती, जितनी तुम्हारे ‘आज’ के चलते हमारे ‘कल’ के बारे में तय करने से होती है। कल प्यार होगा, नहीं होगा , साथ होंगे, नहीं होंगे, excitement रहेगी, नहीं रहेगी, पता नहीं। लेकिन उस ‘कल’ के बारे में बात करके हम अपना ‘आज’ नहीं बिगाड़ रहे क्या? हमारा कल तो तभी आएगा न जब हम अपना आज ख़ुशी से जियेंगे। वरना कल का तो वैसे भी भरोसा नहीं रहता, और आज भी गया हाथ से। ख़ुशी से आज मनाते हैं, कल ख़ुशी साथ लेकर आएगा।

बोलो, है ना?”

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