Berozgar Ashiq-1

ये जो मिडिल क्लास के प्रेमी लौण्डा होता हैं न मियाँ बड़े ही क़तल टाइप का होता हैं। इनका जूनून इनसे कुछ भी करा सकता है.. कुछ भी! मल्लब ये जब प्रेम में पड़ता है न तो दायाँ-बायाँ क्या? अगला-पिछला भी भूल जाता है। ये पुरानी यादों से खिलखिलाता है और भविष्य का सोच के मुस्कियाता है।थोड़ा सटका हुआ होता हैं ये मिडिल क्लास प्रेमी!

उनसे मिलने के लिए कमीने दोस्त से मिन्नतें करके मुटर साईकिल मांगता है(जिनकी खुद की हो वो अन्यथा न लें)! 5 मिनट के सफर को अति सूक्ष्म चाल(प्रकाश की गति का इंवर्स) से 20-25 मिनट तक पूरा करने की कोशिश करता हैं! कभी-कभी(अक्सर) क्लास बंक मारता है! दोस्तों से खिसिया के लड़ लेता है! पॉकेट मनी(जो नाम मात्र होती है) से उनके लिए चॉकलेट, आइसक्रीम हेन-टेन चुटुर-पुटुर ले जाता है। और कुछ किताबें (रेपिडेक्स कम्प्यूटर कोर्स, भार्गव डिक्शनरी आदि) मूड अनुसार देता है! शायद इसी में कहीं प्रेम छुपा है जो बिना उनके मांगे ही सब हाज़िर कर देता है

ऑटो में बगल अगर “वो” बैठीं हो तो उनको एक कम्फर्ट स्पेस देना! उनकी सारी बकवास को भी विथ इंट्रेस्ट सुनना, उनके सड़े हुए जोक पे भी बेहिचक हँसना, साथ में गोलगप्पे एन्जॉय करना, मूवी का शो देखने की बजाय उनसे कंधे से कन्धा मिलाके साथ पार्क रोड पे टहलना, उनकी फिकर जता के करना, उनके पास न होकर भी उनके साथ रहना, उनका रिचार्ज करवाना बिना किसी शर्त या डिमांड के मिलना और जब भी मिलना बावला हो जाना!

उनको हँसते देखना और कहीं अन्तय खो जाना।उनको छत पे खड़े होके अगोरना! उनकी आँखों की चमक में “हाँ” देखना और रेस्त्रों में मजबूरी(साला हमारा नक्षत्र ही ख़राब है!) में उनको इंतज़ार करवाना! उनके लिए अपनी पसंद की घड़ी ख़रीद के जाना और मिल के इतना मदहोश होजाना के उनको देना ही भूल जाए!

उनके स्कूल कालेज के पास चाय की दुकान पे खड़ा होके उनका घंटो इंतज़ार करना और जब वो आजायैं तो उनको देख अचानक आँखे फेर के शर्माना! आय हाय शायद यही तो प्रेम है!
बेरोजगार आशिक

Comments

comments

This post has been viewed 186 times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *