दस का नोट | Ten Rupees note

*दस का नोट*

”इलाके में किसी से भी पूछ लेना कि झब्बू चौक किधर है बस वहीं से लेफ्ट ले लेना।”

 

कुछ ऐसा रौब है अपने झब्बू भैया का। झब्बू भैया पेशे से ऑटो चलाते हैं मगर इलाके में किसी के घर में बच्चा जन्मने से लेकर किसी के स्वर्ग निकलने तक की खबर सबसे पहले झब्बू भैया के पास ही आती है और फिर झब्बू भैया के अप्रूवल के बाद ही वो खबर सार्वजानिक होती है। झब्बू भैया इतने फेमस है कि उनके घर के सामने वाला चौक ”झब्बू चौक” के नाम से जाना जाता है। मोहल्ले के बच्चो के वो चाचा नेहरु हैं तो मोहल्ले की कलियों के लिए इमरान हाशमी और हमउम्र लौंडों के लिए एंग्री यंग मैन यानी अमिताभ बच्चन।

 

विमुद्रीकरण के पूरे दो दिन बाद आज बैंकों और एटीएम में लम्बी कतार थी और इलाके में सिर्फ एक एटीएम होने के चलते दूर दराज़ से लोगों का ताँता लगा हुआ था। झब्बू भैया के बिज़नस की तो जैसे निकल पड़ी थी, दूर दराज़ से लोगों को एटीएम तक लाते और फिर ले जाते।

 

इसी चहल पहल में एक खूबसूरत सी लड़की उनके ऑटो में आकर बैठी और एटीएम की तरफ चलने का इशारा किया। झब्बू भैया ने इतनी खूबसूरत लड़की अपनी ज़िन्दगी में नहीं देखी थी तो अब चांस लेने की कोशिश करने का फाइनल कर लिया।

 

”कितना हुआ भैया?” एटीएम पहुंच कर लड़की ने सवाल किया।

”जी, वैसे तो किराया दस रुपये है मगर अगर आप अपने सवाल से भैया शब्द हटा लें तो फ्री सेवा समझ लीजिये।” झब्बू भैया ने अपने स्टड अवतार में जवाब दिया।

लड़की ज़रा सी मुस्कुराई और जा कर एटीएम की कतार में खड़ी हो गई। झब्बू भैया भी मुस्कुराहट को हरी झंडी समझ ऑटो किनारे लगाकर साहिबा के पीछे कतार में खड़े हो गए।

फिर क्या था, दोनों की बातें शुरू हो गईं। जैसे जैसे कतार आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे बातें भी गहरी होती जा रही थीं और फॉर्मल से इन्फोर्म्ल टॉपिक्स पर जा पहुंची थीं। इसी बीच झब्बू भैया ने मैडम को जाल में फंसते देख नारियल पानी भी पिला दिया था। वक़्त बीतता रहा और झब्बू भैया प्यार के सागर में टाइटैनिक चलाने लग गए।

परेशान भीड़ में अगर कोई खुश था तो वो थे हमारे झब्बू भैया! भीड़ आगे जल्दी ना बढ़े इसलिए जान बूझकर बूढ़े बुजुर्गों को अपने आगे लगाते और पीछे से कोई कुछ कहता तो देशप्रेम, संविधान और नैतिकता का भाषण देने लगते। इश्क में अंधे होने के साथ साथ मानो इश्क ने झब्बू भैया को पॉलिटिक्स, ह्यूमैनिटी और मोरल साइंस का ज्ञान भी दे दिया था।

वक़्त की मार के चलते अब वो घड़ी आ ही गई थी जब एटीएम में दाखिल होने की बारी झब्बू भैया की महबूबा की थी। वो अन्दर गई और पैसे हाथ में लेकर बाहर आते ही झब्बू भैया की तरफ चल दी। झब्बू भैया भी अपने DDLJ के शाहरुख़ की तरह हाथ फैलाकर आँखे बंद किये सोचने लगे कि अब उनकी महबूबा उनके गले लग कर बोलेगी, ”सरसों के खेत ना सही, यहीं इन लोगों के सामने एक रोमांटिक गाना गा लेते हैं।”

मगर नहीं।

कुछ दो मिनट तक आँखें बंद रखने के बाद झब्बू भैया ने आँखें खोलकर देखा तो पता लगा कि उनकी ”मैंने प्यार किया” से पहले ही ”मैंने प्यार क्यों किया” बन चुकी है। उनकी मल्लिका किसी और के गले से लगकर अपने नए 2000 रुपये के नोट के साथ सेल्फी खिंचा रही थी।

झब्बू भैया ने हिम्मत की और मैडम के पास जाकर सवाल किया, ”मिल गए पैसे?”

”यह कौन है डार्लिंग?” सामने से एक नया सवाल बाउंस बैक हुआ।

”ओह! ये ऑटो वाले भैया हैं, इनके साथ ही तो आई हूँ मैं। और पता है क्या? भैया ने 10 रुपये किराया भी नहीं लिया।”

”दिस इस बैड सोनम डार्लिंग। यू शुड पे हिम।”

इतना कहते ही हट्टे कट्टे नौजवान ने अपनी जेब से दस का नोट निकालकर झब्बू भैया को पकड़ा दिया।

”शैल वी गो नाओ मिस्टर गुप्ता?”

”श्योर बेबी।”

इतना कहकर दोनों प्रेमी युगल बाइक में बैठ निकल लिए और झब्बू भैया और उनके ख्वाब समुन्दर में टाइटैनिक से डूब गए।

गुस्साए झब्बू भैया ने उस दस के नोट पर लिख दिया,

”सोनम गुप्ता बेवफा है”

और इस तरह झब्बू भैया का कट गया और सोनम गुप्ता बेवफा हो गई।

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