Kitabikeeda to sabhi h .......be a storyworm

memories

Memory

Memory

दिन ढलता था, चिड़ियाओं गायों बैलों का झुण्ड वापिस आता था! हम दालान में बइठे सब चुपचाप देखते, धीरे धीरे, चूल्हे में आग रखी जाती थी, फुँकनी से फूंकने पर जो धुंआ उठा करता था, नीम के पेड़ के पीछे चला जाता, और गुम हो […]

Dial kiya gaya number mauzud nahi hai

Dial kiya gaya number mauzud nahi hai

यहाँ हंसने के लिए बस अपना चेहरा था और सबके माथे पर चिपका था आईना रात जब भी खांसते हुए, छाती पे जाते है हाथ हथेलिय महसूस करती है पुराने जख्मो के निशान शराब में डूबा मन, डायरी में लिख देता है की पिछली जन्म […]

Thoda sa jhuth thoda sa sach bankar

Thoda sa jhuth thoda sa sach bankar

मैंने ख्वाब तोड़े थे, अपने नाखूनों से. सूरज थोड़ा रोज चुराकर, जलाये थे अपने घर. मैं भागा था एक दफा घर से बहुत दूर पर फाड़ न पाया दीवारों से गुमशुदा लोगो के पोस्टर. छतों पर दफना के जुगनुओं की लाशें, मनाई थी कई दिवालियाँ. […]

Delhi sach me haadso ka sheher hai…

Delhi sach me haadso ka sheher hai…

पूर्व प्रेमिका से राह चलते मिल जाना सिर्फ तभी तक फ़िल्मी लगता है जब तक ये मौका सच में न आ जाये। इतने साल दिल्ली में रह कर मिल पाना न हो पाया और अब जबकि मैं दिल्ली छोड़ चुका हूँ तो दिल्ली के दिल […]

Ha kal mili thi tumse

Ha kal mili thi tumse

हाँ कल मिली थी तुमसे, मगर मिल के भी ना मिली ऐसी मुलाकात रही..जहाँ तुम्हे नज़र भर देख भी ना सकुँ वो मुलाकात होती है क्या?? शायद तुमने आॅरेन्ज कलर कि टी-शर्ट पहन रखी थी, ये गेरूआ रंग भी खूब जँचता है तुमपे.. तुम भी […]

Diwali

Diwali

हमें अच्छे से याद है के बचपन में पापा के साथ दिवाली के ठीक पिछली शाम को बहन के साथ पटाखे ख़रीदने रामलीला मैदान जाते थे! हमें बंदूक़ों(चुटपुटिया वाली) का बड़ा शौक़ हुआ करता था! पापा हमेशा छुरछुरियाँ, जलेबी (चकरघिन्नी) अनार और चुटपुटिया ख़रीदने पर […]

shukriya zindagi me aane ke liye

shukriya zindagi me aane ke liye

मैंने तुमसे कहा था, मेरे सपने भी कितने सपने जैसे होते हैं। जिस रोज मैंने कोई सपना देखा जो सच सा लगे। जिसमे तुम्हारे साथ होने का रत्ती भर भी यकीन हो। उस रोज से ये आशिकी वाला मैं, बेकार मैं, यकीनन कहीं खो जायेगा। […]

Ideal ishq se actual tak

Ideal ishq se actual tak

बदलने को बहुत कुछ बदल चूका हैं। हमारे बिच होने वाली बातें बदल चुकी हैं। कब हम घुमा फिराकर बातें करते करते, इतने ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड हो गये, मालूम तक नही चला। पता हैं, अब तुम मुझे बहुत साधारण सी लगने लगी हो। अब मुझे तुम्हारी […]

Kisse Intezar ke

Kisse Intezar ke

किस्से इंतजार के एक बात याद आ गई अचानक से। सोचा लिख लूँ, वरना फिर भूल जाऊंगा। कितने ही किस्सों को न लिखने के आलस में भूल चूका हूँ। और अब याद भी आते हैं तो फुर्सत से नही आते। अगर इसे भी अभी भूल […]